क्या रमज़ान के महीने में सुगंध लगाना धर्मसंगत है ?

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

रमज़ान के महीने में सुगंध का प्रयोग करना जायज़ है,
और उससे रोज़ा खराब नहीं होगा।

स्थायी समिति के फतावा में है कि :
‘‘गंध (बू)
सामान्यतः चाहे सुगंध वाले हों या बिना सुगंध के हों, रोज़े को खराब नहीं करते हैं चाहे वह रमज़ान में हो या रमज़ान के अलावा में, फर्ज़
रोज़ा हो या नफ्ल।” अंत हुआ।

तथा स्थायी समिति ने यह भी कहा कि:

”जिस व्यक्ति ने रोज़े की हालत में रमज़ान के दिन में किसी भी प्रकार की सुगंध
लगाई उसका रोज़ा खराब नहीं होगा, किंतु वह बुखूर
(धूनी) और पाउडर वाले सुगंध जैसेकि क्सतूरी का पाउडर नहीं सूँघेगा।” अंत हुआ।

फतावा स्थायी समिति (10/271).

तथा शैख इब्ने उसैमीन ने फरमाया:

”जहाँ तक सुगन्ध लगाने की बात है तो यह रोज़ेदार के लिए दिन के प्रारंभिक और
अन्तिम दोनों भागों में जायज़ है, चाहे यह सुगन्ध
बुख़ूर (धूनी) हो, या तेल हो, या इसके अतिरिक्त कोई अन्य पदार्थ हो। किन्तु धूनी को नाक के द्वारा सूँघना
(चढ़ाना) जायज़ नहीं है, इसलिए कि धूनी के
प्रत्यक्ष और दिखाई देने वाले कण होते हैं, उसे जब सूँघा जाता है तो नाक के अन्दर प्रवेष करके पेट तक पहुँच जाते हैं।
इसीलिए नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने लक़ीत बिन सबिरह रज़ियल्लाहु अन्हु से
फरमाया थाः

”नाक में पानी चढ़ाने में मुबालग़ा से काम लो,
सिवाय इसके कि तुम रोज़े से हो।”
 अंत हुआ।

फतावा अरकानुल इस्लाम पृष्ठ 469.