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क्या ईदैन यानी ईदुल-फित्र और ईदुल-अज़्हा की नमाज़ अनिवार्य है या सुन्नत, और जो व्यक्ति उसे छोड़ देता है उसपर क्या पाप हैॽ
हर
प्रकार की
प्रशंसा औऱ
गुणगान केवल
अल्लाह के लिए
योग्य है।
ईदैन यानी
ईदुल-फित्र और
ईदुल-अज़्हा की
नमाज़
फर्ज़-किफ़ाया
है
(अर्थात्
उनकी अदायगी करना
पूरे समुदाय का
दायित्व है)। जबकि
कुछ
विद्वानों का
कहना है किः
वे दोनों नमाज़ें,
जुमा की नमाज़
की तरह
फर्ज़-ऐन हैं
(अर्थात् उनकी
अदायगी करना प्रत्येक
व्यक्ति का दायित्व
है)। अतः
मुसलमान के
लिए उन्हें
छोड़ना उचित
नहीं है।
और
अल्लाह तआला
ही तौफ़ीक़
प्रदान
करनेवाला है।
