मैं फ्रांस में रहती हूँ, और नक़ाब पहनती हूँ। आप लोग यहाँ के मुसलमानों कि स्थिति जानते होंगे, ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए? मैं नक़ाब को बहुत पसन्द करती हूँ परन्तु इसे अपनाने में जीवन बहुत कठिन हो गई है। विशेष कर जब मेरे पति भी यही चाहते हैं कि मैं नक़ाब उतार फेकूँ, उन का ख्याल है कि मैं एक ऐसे मामले मैं सख्ती कर रही हूँ जिस में रूख्सत (छूट) दी गई है। इस मामले ने उनके ऊपर इतना नकारात्मक प्रभाव डाला है कि वह धार्मिक रूप से पीछे हट रहे हैं और उनकी मानसिकता थकी हुई है। क्योंकि हम अपने बच्चों के साथ सुरक्षित रूप से बाहर निकलने तक में भी सक्षम नही हैं। मेरी समझ में नहीं आता कि मुझे क्या करना चाहिए? क्या नक़ाब पहनने पर मेरा धैर्य से काम लेना ज़्यादा बेहतर है या कि इन परिस्थितियों में मेरा इस मामले में सख्ती बरतना धर्म में अतिशयोक्ति समझा जाएगा? यह सही है शरीयत के मामले सदैव सक्षमता व सामर्थ्य के साथ संबंधित होते हैं। तो मुझे कैसे मालूम हो कि मैं इस इबादत के लिए सक्षम हूँ या नहीं हूँ? यह मुद्दा मेरे जीवन को बहुत प्रभावित कर रहा है, और मुझे नहीं मालूम कि उचित व्यवहार क्या है।

उत्तर
:

हर प्रकार की
प्रशंसा और
गुणगान केवल
अल्लाह के लिए
योग्य है।

हाँ, हम पर यह
बात पोशीदा
नहीं है कि
कुछ पश्चिमी
देशों में
हमारी
मुस्लिम
बहनों को
नक़ाब पहनने
के कारण कष्ट
व कठिनाई का
सामना करना
पड़ रहा है।

धार्मिक विद्वानों
ने इस बात को
स्पष्ट रूप से
बयान किया है
कि औरत के लिए,
आवश्यकता
पड़ने पर,
अपना चेहरा या
अपने शरीर का
कुछ भाग खोलना
जायज़ है,
जैसे उदाहरण
के तौर पर
दवा-इलाज की
ज़रूरत।

और मूर्खों
के कष्ट और अत्याचार
का निवारण
करना उसकी
दवा-इलाज के
लिए अवश्यकता से
कम नहीं है,
बल्कि
अधिकांश
परिस्थितियों
में इसकी
अवश्यकता
दवा-इलाज की
ज़रूरत से बढ़कर
होती है।

इस आधार पर,
यदि आप का
अधिक गुमान यह
है कि नक़ाब
पहनने के कारण
आप को कष्ट और ज़्यादती
(अतिक्रमण) का
सामना करना
पड़ेगा तो आप
के लिए अपना
चेहरा खोलने
में कोई
आपत्ति की बात
नही है, और इस
के कारण आप पर
कोई पाप नही
होगा।
क्योंकि आप
ऐसा मजबूरी
में और ज़रूरत
के कारण कर
रही हैं, यह नक़ाब
पहनने की
अस्वीकृति के
कारण नहीं है।

और अल्लाह
ही
सर्वश्रेष्ठ ज्ञान
रखता है।