इस बात का प्रमाण क्या है कि नींद से वुज़ू टूट जाता है? तथा इस बात की क्या व्याख्या की जायेगी कि अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सोने के बाद बिना वुज़ू किए हुए नमाज़ के लिए खड़े हो जाते थे, जैसा कि इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा के साथ क़ियामुल्लैल की हदीस में है?
हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।
जहाँ
तक इस बात के प्रमाण
का संबंध है कि
नींद से वुज़ू टूट
जाता है,
तो इसके
बारे में सफवान
बिन अस्साल रज़ियल्लाहु
अन्हु की हदीस
में प्रमाणित है
कि उन्हों ने कहा
: अल्लाह के पैगंबर
सल्लल्लाहु अलैहि
व सल्लम हमें आदेश
देते थे जब हम सफर
में होते थे कि
हम अपने मोज़े तीन
दिन और तीन रात
न निकालें सिवाय
जनाबत के। और
न निकालें शौच,
पेशाब
और नींद से।’’
इसे तिर्मिज़ी
(हदीस संख्या : 89) ने
रिवायत किया है
और अल्बानी ने
हसन कहा है,
तो इस
हदीस में नींद
को वुज़ू तोड़ने
वाली चीज़ों में
से उल्लेख किया
गया है।
तथा
प्रश्न संख्या
(36889) के उत्तर में
नींद से वुज़ू टूटने
के बारे में विद्वानों
के मतभेद का उल्लेख
किया जा चुका है,
और यह वर्णन
किया गया है कि
राजेह (सही) बात
यह है कि नींद यदि
गहरी है तो उससे
वुज़ू टूट जाता
है,
परंतु मामूली
नींद से वुज़ू नहीं
टूटता है।
दूसरा
:
जहाँ
जक इब्ने अब्बास
की हदीस का संबंध
है जिसकी ओर प्रश्न
करनेवाले ने संकेत
किया है तो उसे
बुखारी (हदीस संख्या
: 698) और मुस्लिम (हदीस
संख्या : 763) ने इब्ने
अब्बास रज़ियल्लाहु
अन्हुमा से रिवायत
किया है कि उन्हों
ने कहा : मैं ने मैमूना
रज़ियल्लाहु
अन्हा के यहाँ
रात बिताई और नबी
सल्लल्लाहु अलैहि
व सल्लम उस रात
उनके यहाँ थे।
तो आप ने वुज़ू किया
फिर खड़े होकर नमाज़
पढ़ने लगे। तो मैं
भी आपके बायें
खड़ा हो गया। तो
आप ने मुझे पकड़कर
अपने दायें कर
लिया। चुनाँचे
आप ने तेरह रकअत
नमाज़ पढ़ी। फिर
आप सो गए यहाँ तक
कि आपके नाक से
आवाज़ आने लगी।
और आप जब सोते थे
तो नाक से आवाज़
आती थी। फिर मोअजि़्ज़न
आया तो बाहर निकले
और नमाज़ पढ़ी जबकि
वुज़ू नहीं किया।
पता
चला कि नबी सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम
सोए थे और उठकर
नमाज़ पढ़ने लगे
जबकि आप ने वुज़ू
नहीं किया। विद्वानों
ने उल्लेख किया
है कि यह हुक्म
(नींद से वुज़ू का
न टूटना) अल्लाह
के पैगंबर सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम
के लिए विशिष्ट
है,
क्योंकि नबी सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम
की आँख सोती थी
और आपका दिल नही
सोता था। सो यदि
आपको अपवित्रता
होती तो आपको इसका
एहसास हो जाता।
इमाम
नववी कहते हैं
:
हदीस
के शब्द :
‘‘फिर आप
लेटकर सो गए यहाँ
तक कि आप खर्राटे
लेने लगे। फिर
उठकर नमाज़ पढ़ी
और वुजू नहीं किया।’’
यह आप सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम
की विशेषताओं में
से है कि आपके लेट
कर सोने से वुज़ू
नहीं टूटता था,
क्योंकि
आपकी आँखें सोती
हैं और आपका दिल
नहीं सोता है।
सो यदि आपको हदस
(अपवित्रता)
लाहिक़ होती
(याना वुज़ू
टूटजाता) तो आपको
इसका एहसास होता,
जबकि आपके
अलावा लोगों का
मामला इसके अलावा
है।’’
अंत हुआ।
तथा
हाफिज़ इब्ने हजर
कहते हैं:
रावी
का कथन : (आप ने नमाज़
पढ़ी और वुज़ू नहीं
किया) आप सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम
की आँखें सोती
थीं जबकि आपका
दिल नहीं सोता
था,
सो यदि आप को हदस
होता तो आपको इसका
पता चल जाता। इसीलिए
कभी कभार आप नींद
से उठने के बाद
वुज़ू करते थे और
कभी वुज़ू नहीं
करते थे। खत्ताबी
कहते हैं : आपके
दिल को सोने से
इसलिए रोक दिया
गया ताकि आपकी
नींद में आपको
जो वह्य
(प्रकाशना,
ईश्वाणी) आती है,
उसे याद कर सकें।’’
अंत हुआ।
तथा
बुखारी (हदीस संख्या
: 3569) ने आयशा रज़ियल्लाहु
अन्हा से रिवायत
किया है कि अल्लाह
के पैगंबर सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम
ने फरमाया : ”मेरी
आँख सोती है जबकि
मेरा दिल नहीं
सोता है।”
तथा इमाम
अहमद (हदीस संख्या:
7369) ने इसे अबू हुरैरा
रज़ियल्लाहु अन्हु
से रिवायत किया
है।
तथा
देखिए :
‘‘सिलसिलतुल
अहादीस अस्सहीहा’’
लिल-अल्बानी
(
हदीस संख्या
: 696)
तथा
इब्ने माजा (हदीस
संख्या : 474) ने आयशा
रज़ियल्लाहु अन्हा
से रिवायत किया
है कि उन्हों ने
कहा : अल्लाह के
रसूल सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम
सोते थे यहाँ तक
कि आप खर्राटा
लेने लगते थे,
फिर आप
उठकर नमाज पढ़ते
और वुज़ू नहीं करते
थे।’’
अल्लामा
सिंधी
‘हाशिया इब्ने
माजा” में कहते
हैं
:
हदीस
का शब्द (हत्ता
यनफुखा) से अभिप्राय
वह आवाज़ है जो सोनेवाले
आदमी से सुनी जाती
है।
तथा
हदीस के शब्द (चुनाँचे
आप नमाज़ पढ़ते और
वुज़ू नहीं करते।)
क्योंकि आपकी आँख
सोती थी और आप का
दिल नहीं सोता
था। जैसा कि सहीह
हदीसों में यह
स्पष्ट रूप से
वर्णित है,
अतः आपकी
नींद से वुज़ू नहीं
टूटता है। क्योंकि
नींद से उस समय
वुज़ू टूटता है
जब सोने वाले पर
उससे किसी चीज़
के निकलने का डर
हो और उसे उसका
बोध न हो। और यह
बात उस व्यक्ति
के बारे में सत्यापित
नहीं होती है जिसका
दिल नहीं सोता
है। फिर उन्हों
ने कहा : अतः इस अध्याय
(अर्थात नींद से
वुज़ू टूटने के
अध्याय) में आप
सल्लल्लाहु अलैहि
व सल्लम के सोने
की हदीसों का वर्णन
करना उचित नहीं
है। सिवाय इसके
कि उसके साथ ही
यह उल्लेख किया
जाए कि यह हुक्म
नबी सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम
के साथ विशिष्ट
था। अतः मननचिंतन
करना चाहिए।’’
सक्षेप
के साथ अंत हुआ।
