उस व्यक्ति का हुक्म क्या है जो काम से थका हुआ वापस आता है और भोजन करने के बाद अस्र की अज़ान का इंतज़ार करता है, फिर घर में अकेले नमाज़ पढ़ता है और जमाअत के साथ (मिस्जद में) नमाज़ पढ़ने के लिए नहीं जाता है फिर सो जाता है ?
हर प्रकार की
प्रशंसा और गुणगान अल्लाह के लिए योग्य है।
समाहतुश्शैख
अब्दुल अज़ीज़ बिन बाज़ रहिमहुल्लाह से ऐसा ही एक प्रश्न किया गया तो उन्हों ने उत्तर
दिया :
आप ने जो कुछ
उल्लेख किया है वह एक ऐसा बहाना (उज़्र) नहीं है जो आप के लिए जमाअत के साथ नमाज़
पढ़ने से पीछे रह जाने को वैध कर दे, बल्कि आप के ऊपर अनिवार्य है कि अपने मुसलमान
भाईयों के साथ सर्वशक्तिमान अल्लाह के घरों (मस्जिदों) में नमाज़ पढ़ने के लिए जल्दी
करें, फिर इस के बाद आप आराम करें और खाना खायें, क्योंकि अल्लाह तआला ने आप के
ऊपर अपने मुसलमान भाईयों के साथ जमाअत में नमाज़ को उस के समय पर अदा करना अनिवार्य
कर दिया है, और आप ने जो कुछ उल्लेख किया है वह उस से पीछे रहने का कोई शरई (वैध)
उज़्र (कारण) नहीं है, बल्कि वह शैतान और बुराई का अदेश देने वाली आत्मा का धोखा,
ईमान (विश्वास) की कमज़ोरी, और सर्वशक्तिमान अल्लाह से डर के अभाव के कारण है, अत:
आप अपने मन की इच्छा, अपने शैतान, और बुराई का आदेश देने वाली अपनी आत्मा से बचाव
करें, आप का परिणाम अच्छा होगा, और आप लोक और परलोक (दुनिया और आख़िरत) में मोक्ष
(नजात) और सौभाग्य से लाभान्वित होंगे। अल्लाह तआला आप को अपनी आत्मा की दुष्टता
से बचाये, और शैतान के वस्वसों से सुरक्षित रखे।
