किसी कार्य पर अल्लाह तआला का शुक्र (धन्यवाद) अदा करने के लिए नमाज़ का तरीक़ा क्या है, और उस के स्तंभ और शर्तें क्या हैं?

उत्तर :

हर प्रकार
की प्रशंसा और
गुणगान केवल अल्लाह
के लिए योग्य है।

शुक्र का सज्दा
हर्षदायक चीज़ के
लिए, जैसे किसी
लाभ के प्राप्त
होने या किसी हानि
के दूर होने पर,
धर्म संगत है।
इस पर हदीसें और
आसार दलालत करते
हैं। हदीसों के
प्रमाण में से
अबू बक्र रज़ियल्लाहु
तआला अन्हु की
यह हदीस है कि : ”जब
अल्लाह के नबी
सल्लल्लाहु अलैहि
व सल्लम के पास
कोई खुश करनेवाली
बात आती थी और आपको
उसकी सूचना दी
जाती थी, तो आप अल्लाह तआला
के लिए शुक्र अदा
करते हुए सज्दा
में गिर जाते थे।”
इसे नसाई के अलावा
शेष पाँचों इमामों
ने रिवायत किया
है, इमाम तिर्मिज़ी
रहिमहुल्लाहु
तआला कहते हैं
कि : यह हदीस हसन
गरीब है।

और मुसनद अहमद
के शब्द यह हैं
कि : वह अल्लाह के
नबी सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम
के पास उपस्थित
थे कि आपके पास
एक शुभ सूचना देने
वाला आया जिसने
आप को आपकी एक सेना
के अपने दुश्मन
पर विजय पाने की
शुभ सूचना दी, जबकि
आपका सिर आयशा
रज़ियल्लाहु तआला
अन्हा की गोद में
था, तो आप सज्दे में
गिर गए।” इसे अहमद
(5/45) और हाकिम (4/291) ने
रिवायत किया है।

उन्हीं हदीसों
में से : अबदुर्रहमान
बिन औफ़ रज़ियल्लाहु
तआला अन्हु की
हदीस है कि उन्हों
ने कहा : ”अल्लाह
के नबी सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम
बाहर निकले और
अपने सद्क़ा की
ओर गए और प्रवेश
कर क़िब्ला की ओर
मुख किया और सज्दे
में गिर गए और लंबा
सज्दा किया, फ़िर अपना
सिर उठाया और फरमाया
: ”मेरे पास जिबराइल
अलैहिस्सलाम आए, और मुझे
शुभसूचना देते
हुए कहा कि : अल्लाह
अज़्ज़ा व जज्ल
आप से कहता है : जिस
व्यक्ति ने भी
आप पर दरूद पढ़ा
मैं उस पर दया
व कृपा अवतरित
करूंगा, और जिस ने आप पर
सलाम पढ़ा मैं उस
पर सलाम पढ़ूँगा, तो मैं अल्लाह
तआला का शुक्र
अदा करते हुए सज्दे
में गिर गया।” इसे
इमाम अहमद रहिमहुल्लाह
ने रिवायत किया
है।

इमाम मुन्ज़िरी
रहिमहुल्लाह कहते
हैं : ”शुक्र के सज्दा
की हदीस बरा रज़ियल्लाहु
तआला अन्हु की
हदीस से सही इसनाद
के साथ तथा कअब
बिन मालिक रज़ियल्लाहु
तआला अन्हु आदि
की हदीस से आई है।”
अंत हुआ।

रही बात इस
संदर्भ में आने
वाले आसार की, तो
उन्हीं में से
: यह है कि जब अबू
बक्र रज़ियल्लाहु
तआला अन्हु को
मुसैलिमा कज़्ज़ाब
की हत्या की सूचना
पहुँची तो उन्हों
ने सज्दा किया।
इसे सईद बिन मनसूर
ने अपनी सुनन में
रिवायत किया है।

और अली रज़ियल्लाहु
अन्हु ने जब ज़ुस्सदियह
को ख़वारिज में
पाया, तो उन्हों ने सज्दा
किया। इसे इमाम
अहमद रहिमहुल्लाहु
तआला ने मुसनद
में रिवायत किया
है।

तथा अल्लाह
के नबी सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम
के समय काल में
जब कअब बिन मालिक
रज़ियल्लाहु तआला
अन्हु को अल्लाह
के उनकी तौबा को
स्वीकार कर लेने
की शुभसूचना दी
गई, तो उन्हों ने सज्दा
किया, और उनकी कहानी
की प्रामाणिकता
पर सर्व सहमति
है।

अल्लाह तआला
ही तौफीक़ प्रदान
करने वाला है, तथा अल्लाह
तआला हमारे नबी
सल्लल्लाहु अलैहि
व सल्लम और उन की
संतान और सहाब-ए-किराम
पर अपनी कृपा व
दया और शांति अवतरित
करे।